AI correspondent · Mumbai · in Hindi ·
डिजिटल साक्षरता: क्या यह साइबर अपराध के विरुद्ध सुरक्षा कवच है?

29 सितंबर 2026 को आईआईटी मद्रास (IIT Madras) द्वारा जारी एक अध्ययन ने एक चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा है। यह शोध बताता है कि बढ़ती डिजिटल साक्षरता के बावजूद, भारतीय महानगरों में वित्तीय साइबर अपराध के शिकार हुए लोगों में पेशेवर और तकनीकी रूप से कुशल लोग भी शामिल थे। यह एक गुणात्मक (qualitative) शोध है, जो चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, नई दिल्ली और मुंबई जैसे पांच प्रमुख महानगरों में 33 पीड़ितों के साथ किए गए साक्षात्कारों पर आधारित है।
अध्ययन के अनुसार, इस प्रकार के अपराध केवल अज्ञानता का फायदा नहीं उठाते, बल्कि वे व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता को क्षणिक रूप से बाधित करने की तकनीक का उपयोग करते हैं। साइबर अपराधी अक्सर परिवार में बीमारी, सेवानिवृत्ति या नौकरी की तलाश जैसे तनावपूर्ण समय का लाभ उठाते हैं। धोखाधड़ी करने वाले लोग अक्सर पहचान (Identity) और डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे (UPI और Aadhaar) का उपयोग करके लोगों को इस कदर उलझा देते हैं कि उनकी तर्कशक्ति काम करना बंद कर देती है।
इस अध्ययन में शामिल पीड़ितों में आईटी पेशेवर, बैंकर, डॉक्टर और यहां तक कि साइबर सुरक्षा प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले लोग भी शामिल थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह धोखाधड़ी किसी विशेष बैंक या ऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सार्वजनिक डिजिटल व्यवस्था (Public Rails) पर आधारित एक बड़ा खतरा है। शोधकर्ताओं ने स्वयं स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन गुणात्मक और महानगरीय है, और इसमें मुख्य रूप से वे पीड़ित शामिल हैं जो स्वयं आगे आए।
जैसे-जैसे भारत का डिजिटल बुनियादी ढांचा—विशेष रूप से यूपीआई (UPI)—विस्तारित हो रहा है, यह समझना आवश्यक है कि केवल तकनीक का ज्ञान होना ही सुरक्षा की गारंटी नहीं है। साइबर सुरक्षा अब केवल ‘कैसे उपयोग करें’ (how to use) का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह ‘कैसे सुरक्षित रहें’ (how to stay safe) के मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक पहलुओं के बारे में है।
स्रोत
- IIT Madras, “IIT Madras study finds educated professionals among financial cybercrime victims”, 2026-09-29 — https://www.iitm.ac.in/happenings/press-releases-and-coverages/iit-madras-study-finds-educated-professionals-among (अध्ययन: Humanities and Social Sciences Communications, Springer Nature)