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भारत की नई AI गवर्नेंस गाइडलाइन्स: नवाचार और निजता के बीच नई रेखा

लीड
भारत सरकार ने हाल ही में India AI Governance Guidelines 2025 जारी की हैं, जो सख्त कानून की बजाय “स्मार्ट, एडॉप्टिव गवर्नेंस” पर जोर देती हैं। उसी समय, सरकार ने साइबर सुरक्षा ऐप Sanchar Saathi को सभी स्मार्टफोनों पर जबरन प्री-इंस्टॉल करवाने का आदेश दिया और फिर भारी विरोध के बाद उसे वापस भी ले लिया। इन दो घटनाओं ने मिलकर यह सवाल तेज कर दिया है कि भारत AI के दौर में नागरिक अधिकार, नवाचार और राज्य की शक्ति के बीच संतुलन कैसे बनाएगा।

संदर्भ
5 नवंबर 2025 को जारी India AI Governance Guidelines का मकसद यह दिखाना है कि भारत AI को सीधे कठोर कानूनों से नहीं, बल्कि जोखिम आधारित और लचीले गवर्नेंस फ्रेमवर्क से संभालना चाहता है। गाइडलाइन्स “इनोवेशन बनाम रिस्क” के संतुलन पर जोर देती हैं और खुद को EU AI Act जैसी सख्त कानून व्यवस्था के विकल्प के रूप में पेश करती हैं।

इसी पृष्ठभूमि में, भारत सरकार ने दूरसंचार से जुड़े साइबर फ्रॉड रोकने के नाम पर एक आदेश जारी किया, जिसमें सभी नए स्मार्टफोनों पर सरकार संचालित साइबर सुरक्षा ऐप Sanchar Saathi को प्री-इंस्टॉल और नॉन-रीमूवेबल बनाना था, और पुराने डिवाइसों पर भी अपडेट के जरिए पुश करना था। प्राइवेसी समूहों, विपक्ष और ग्लोबल हैंडसेट निर्माताओं के विरोध के बाद सरकार को यह आदेश वापस लेना पड़ा।

उधर, UNDP की हाल की रिपोर्ट ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर—आधार, UPI, DigiLocker जैसी प्रणालियों—और बढ़ते AI इकोसिस्टम को “इनक्लूसिव AI ट्रांजिशन” के लिए वैश्विक मॉडल बताया है। रिपोर्ट का तर्क है कि भारत का DPI, बड़े तकनीकी वर्कफोर्स और पब्लिक-इंटरेस्ट अप्रोच के साथ मिलकर दुनिया के लिए एक अलग रास्ता दिखा सकता है।

विश्लेषण
नई AI गवर्नेंस गाइडलाइन्स तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण हैं:

1) नीति की दिशा – भारत IndiaAI Mission के तहत ₹10,300 करोड़ से अधिक के बजट, पब्लिक GPU इन्फ्रास्ट्रक्चर, इंडिजिनस फाउंडेशन मॉडल, स्टार्टअप फाइनेंसिंग और Safe & Trusted AI जैसे स्तंभों पर काम कर रहा है। गाइडलाइन्स इसी बड़े मिशन के “सॉफ्ट लॉयर” के रूप में दिखती हैं—कानून से पहले दिशा तय करने वाली परत।

2) निजता और निगरानीSanchar Saathi प्री-लोडिंग आदेश और फिर तेज़ी से किया गया यू-टर्न, यह दिखाता है कि AI युग में “सेफ्टी” और “सर्विलांस” के बीच की रेखा कितनी पतली है। जब सरकार किसी ऐप को नॉन-रीमूवेबल बनाती है और बाद में विरोध के दबाव में हटाती है, तो यह भ्रांति पैदा होती है कि भविष्य में AI और डेटा-ड्रिवन सिस्टम्स किन सीमाओं के भीतर काम करेंगे। यह बात DPDP Act 2023 के “कंसेंट” और “लीजिटिमेट यूज़” के सिद्धांतों से भी टकराती हुई दिख सकती है, जिन्हें नागरिक डेटा की सुरक्षा के लिए पेश किया गया था।

3) DPI + AI = सार्वजनिक भरोसा – UNDP और कई वैश्विक फोरम यह मान रहे हैं कि भारत का DPI मॉडल—आधार, UPI, DigiLocker इत्यादि—AI के साथ मिलकर सार्वजनिक सेवाओं को काफी अधिक कुशल बना सकता है। लेकिन यही मॉडल, अगर पारदर्शी गवर्नेंस और मजबूत प्राइवेसी गार्डरेल के बिना तेज़ी से आगे बढ़ा, तो “इनक्लूसिव AI” की जगह “डेटा असिमेट्री” को बढ़ा सकता है, जिसमें राज्य और कॉर्पोरेट के पास नागरिकों से कहीं ज्यादा शक्ति और जानकारी जमा हो जाती है।

कुल मिलाकर, भारत अभी AI गवर्नेंस के उस मोड़ पर खड़ा है जहां नीति दस्तावेज़ आधुनिक हैं, लेकिन क्रियान्वयन में कभी-कभी अचानक, टॉप-डाउन फैसले दिखते हैं—जिन्हें फिर जन-दबाव के बाद वापस लेना पड़ता है। यह पैटर्न AI स्टार्टअप्स, वैश्विक निवेशकों और नागरिक समाज, तीनों के लिए अनिश्चितता पैदा करता है।

House Reflection
HouseOf7.ai के नज़रिए से भारत का AI सफर एक साथ दो लेयर पर चल रहा है:

– ऊपर की परत पर, IndiaAI Mission, DPI और नई गाइडलाइन्स यह दिखाती हैं कि भारत AI को केवल मार्केट अवसर नहीं, बल्कि सार्वजनिक भलाई और टेक्नोलॉजी संप्रभुता के उपकरण के रूप में देखना चाहता है।
– नीचे की परत पर, Sanchar Saathi जैसी घटनाएं याद दिलाती हैं कि “सेक्योरिटी” के नाम पर लिए गए निर्णय, अगर पारदर्शिता और जन संवाद के बिना हों, तो भरोसे को कमजोर कर सकते हैं—खासकर तब जब AI और डेटा एनालिटिक्स इन सिस्टम्स का इंजन हों।

भारत सदियों से विचार, आस्था और तर्क—तीनों के संगम का स्थल रहा है। आज की चुनौती यह है कि डिजिटल युग का “धर्म” नागरिक अधिकारों, इंसाफ और जवाबदेह टेक्नोलॉजी को केन्द्र में रखे, न कि सिर्फ़ कुशलता या नियंत्रण को।

खुला प्रश्न
जब AI गवर्नेंस गाइडलाइन्स “स्मार्ट, एडॉप्टिव” मॉडल की बात करती हैं, तो भारत व्यावहारिक रूप से नागरिकों की आवाज़—विशेषकर ग्रामीण, हाशिए पर मौजूद और लो-टेक समुदायों—को AI नीति और DPI डिज़ाइन में संस्थागत रूप से कैसे शामिल करेगा, ताकि “AI for All” स्लोगन के साथ-साथ वास्तविक सहभागिता भी दिखे?

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