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IIT मद्रास का स्कूल कनेक्ट कार्यक्रम: कक्षा IX के लिए विस्तार और भाषाई संभावनाएँ

IIT मद्रास के शिक्षा विस्तार कार्यक्रम (School Connect) के लिए आवेदन प्रक्रिया अब कक्षा IX के छात्रों के लिए भी खोल दी गई है। यह निर्णय संस्थान के ‘सेंटर फॉर आउटरीच एंड डिजिटल एजुकेशन’ (CODE) द्वारा लिया गया है, जो अक्टूबर 2026 के बैच के लिए उपलब्ध है।
वर्तमान में, यह कार्यक्रम मुख्य रूप से अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं में उपलब्ध है। हालाँकि, संस्थान ने घोषणा की है कि सात अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी पाठ्यक्रम विकसित करने की प्रक्रिया जारी है। इन सात भाषाओं के नाम अभी घोषित नहीं किए गए हैं। यह विस्तार भारत के विविध भाषाई परिवेश में तकनीकी शिक्षा की पहुँच को और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- पाठ्यक्रम विस्तार: पहली बार कक्षा IX के छात्रों को भी कक्षा X, XI और XII के साथ इस कार्यक्रम में शामिल किया जा रहा है।
- विषय: सत्रह विषयों में डेटा साइंस, एआई (AI), साइबर सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, डिजिटल ह्यूमैनिटीज और गेम टेक्नोलॉजी जैसे विषय शामिल हैं।
- पहुँच: यह बैच 5 अक्टूबर 2026 से आठ सप्ताह तक चलेगा, और इसमें पूर्व-रिकॉर्डेड व्याख्यान, लाइव सत्र, असाइनमेंट तथा कंप्यूटर-आधारित मूल्यांकन शामिल हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है।
- प्रमाणन: पाठ्यक्रम पूरा करने पर IIT मद्रास CODE द्वारा ई-प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।
संस्थान के अपने आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस कार्यक्रम के माध्यम से 1,75,000 से अधिक छात्रों ने लाभ उठाया है और 4,900 से अधिक स्कूल इससे जुड़े हैं, जिनमें से 60 से अधिक भारत के बाहर हैं। IIT मद्रास का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस नेटवर्क को 25,000 स्कूलों तक पहुँचाने का है; इस लक्ष्य के साथ कोई तिथि नहीं जोड़ी गई है।
डिजिटल धर्म और न्याय का लेंस:
जब हम तकनीक और शिक्षा के इस संगम को देखते हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या केवल अंग्रेजी और हिंदी तक सीमित रहना भारत की भाषाई विविधता के साथ न्याय है? हालांकि सात क्षेत्रीय भाषाओं को विकसित करने की घोषणा एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन वास्तविक ‘सेवा’ (Seva) तब होगी जब ये पाठ्यक्रम उन छात्रों की मातृभाषा में उपलब्ध होंगे जो तकनीक के इस नए युग में पीछे छूटने के डर में जी रहे हैं। भाषाई संप्रभुता केवल एक नीतिगत शब्द नहीं, बल्कि डिजिटल युग में समावेशी न्याय (Nyaya) सुनिश्चित करने का आधार है। घोषित और उपलब्ध के बीच का यह अंतर ही वह जगह है जहाँ न्याय की परीक्षा होती है।
क्या तकनीकी शिक्षा का यह विस्तार केवल शहरों तक सीमित रहेगा, या यह वास्तव में भारत के दूरस्थ कोनों तक पहुँचने का वादा निभा पाएगा?